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Stock Market News: ईरान-अमेरिका तनाव से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा टूटा

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Alam Ki Khabar: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय शेयर बाजार दबाव में आ गया। सेंसेक्स 550 अंक से अधिक टूटा, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे फिसल गया।

मुंबई, 8 जुलाई। आलम की खबर: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच सेंसेक्स 550 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,250 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस गिरावट के पीछे ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 550 अंक की गिरावट के साथ 77 हजार के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी 24,250 के नीचे पहुंच गया। वहीं रुपये में भी डॉलर के मुकाबले कमजोरी दर्ज की गई। तेल कीमतों में तेजी का सबसे अधिक असर ऑयल मार्केटिंग और एविएशन कंपनियों पर देखने को मिला। भारत पेट्रोलियम (BPCL) के शेयरों में करीब चार प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयर भी दबाव में रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ईंधन लागत बढ़ाती हैं, जिससे इन क्षेत्रों की कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। वैश्विक बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे, जबकि हांगकांग के बाजार में बढ़त दर्ज की गई। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कंपनियों के जून तिमाही नतीजों, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति, मानसून की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश संबंधी निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

वैश्विक घटनाओं का बाजार पर सीधा असर

भारतीय शेयर बाजार अब केवल घरेलू संकेतकों से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से भी तेजी से प्रभावित होता है। ऐसे समय में निवेशकों के लिए घबराहट के बजाय दीर्घकालिक रणनीति और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर निर्णय लेना अधिक महत्वपूर्ण है।

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